अजनबी शहर में कामवाली

दोस्तों, मेरा नाम सतीश है और मेरी उम्र २४ साल की है। मैं मुम्बई में नौकरी करता हूँ और रहने वाला इन्दौर का हूँ। अब मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ।

आज से तीन साल पहले मैं मुम्बई नौकरी करने आया था। तब मुम्बई मेरे लिए अजनबी शहर था, इसलिए मुझे मेरा अकेलापन खलता था, मुझे भी एक अच्छी दोस्त की ज़रूरत थी, ताकि मेरा समय भी कट सके और मेरी काम-इच्छा भी पूरी हो सके। मैंने बहुत प्रयास किया पर

किसी भी अमीर और ख़ूबसूरत लड़की को पटा नहीं सका, क्योंकि यहाँ कि लड़कियों को पैसे वाले लंड पसन्द आते हैं।
तो मैंने आख़िर में एक मध्यम-वर्गीय लड़की जो दूसरों के घरों में काम करने जाती थी, उसको अपनी नौकरी और पैसे की झलक दिखलाकर पटा लिया। मेरी उससे फोन पर बातचीत भी शुरु हो गई। एक दिन शाम को मैंने उसे अपने घर बुलाया यह कह कर कि मेरी तबीयत ख़राब है और मेरे सभी दोस्त घर गए हैं। तुम मेरे लिए खाना बना दो, वरना मुझे भूखा ही सोना पड़ेगा। मेरी तबीयत ख़राब है, यह सोचकर वो मेरे लिए खाना बनाने मेरे फ्लैट में आ गई। मैं कई दिनों से इसी ताक में था कि कब मेरे दोस्त लोग फ्लैट पर ना हों और मैं उस कामवाली को चोद दूँ। उस दिन जब वो मेरे फ्लैट में आई तो मैं खुश हो गया। मैंने उसे किचन दिखा दिया, जब वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तो मैंने धीरे से उसके पीछे जाकर थोड़ा सा चिपक कर खड़ा हो गया। वह अचानक मुझे पीछे देखकर घबरा सी गई और बोली, “आपकी तबीयत ख़राब है, आप जाकर आराम कीजिए… मैं खाना बना दूँगी…”

मैं उसकी बात सुनकर उससे थोड़ा और चिपक गया। इससे पहले कि वो कुछ कहती मैं उसकी दोनों चूचियों को एक बार ज़ोर से दबा दिया और फिर सहलाने लगा। पहले तो उसे बहुत डर लगा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सहलाने से उसे मज़ा आने लगा और वो आँखें बन्द कर मज़े लेने लगी। मैंने लोहा गरम होते देख उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया और उससे पहले कि वह कुछ विरोध कर, मैंने उसकी चूत में उँगली डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा। वो अब सब कुछ भूल कर मदहोश होने लगी।

मैं उसे किचन में ही नंगा करने लगा और वो कुछ नहीं बोली। थोड़ी ही देर में वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसके शरीर पर एक भी तिनका कपड़ा का नहीं बचा था। उसे इस तरह देखकर मेरा लण्ड तुरन्त खड़ा हो गया। अब वो भी जोश में आकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मैं भी उसकी मदद करते हुए जल्दी से पूरा नंगा हो गया।

मैंने अब अपना लंड उसके मुँह में डालना चाहा तो शर्म के मारे उसने मना कर दिया। फिर मैंने दूसरा तरीका अपनाया। मैंने अब उसे ज़मीन पर सुला कर उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसकी चूत को ज़ोरों से चाटने लगा। अब उसने मस्ती और मदहोशी में चूर होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं। मैंने इसी बात का फ़ायदा उठा कर उसकी चूत चाटते-चाटते ही 69 की मुद्रा में आ गया और मेरा लण्ड उसके होंठों पर रख दिया। पर इस बार भी उसने मना कर दिया। मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगा और कपड़े पहनने लगा।

अब तक तो वह इतनी गरम हो चुकी थी कि मुझसे चुदवाने के लिए कुछ भी करना पड़े तो वो कर सकती थी। उसने तुरन्त मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी। मेरी योजना सफल हो गई, मैं बहुत खुश हुआ। आज तो जैसे लकी ड्रा ही निकल आया था मेरे लिए, अब हम दोनों 69 की स्थिति में थे। मैं उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरा लंड चूस रही थी। क़रीब आधे घंटे तक मैंने उसके मुँह की चुदाई की, इसी दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी, और मेरे लंड ने भी उसके मुँह में एक बार उल्टी कर दी थी। वो उस सफेद गाढ़े द्रव को पूरा पी गई।

अब तक आग दोनों ओर भड़क चुकी थी। मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अब उसकी चूत में डालने लगा, लेकिन उसकी चूत काफी तंग थी, अतः मैं असफल हो गया। उसकी सील शायद अभी तक नहीं तोड़ी गई थी। मैंने किचेन से तेल लेकर अपने लंड पर और थोड़ा तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया और फिर से चूत में लंड डालने लगा। इस बार मैंने उसकी चूत में एक ज़ोर का झटका दिया और लंड दो इंच तक अन्दर घुसा दिया। इस झटके से वो तड़प उठी और ज़ोर से चिल्लाई। मैंने उसका मुँह तुरन्त बन्द कर दिया, और साथ ही एक और झटका दिया तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए। मैं डर गया तो मैंने उसके मुँह से हाथ हटा लिया। वो बहुत रोई, अब उसकी चूत से खून निकल रहा था। मैंने उससे धीरे-धीरे चोदने का वादा करके फिर से राजी किया। अब मैं अपनी कमर धीरे-धीरे चला रहा था और ऐसे ही धीरे-धीरे अपना ८ इंच लम्बा लंड उसकी चूत के अन्दर गाड़ ही दिया।

थोड़ी देर में दर्द कम होने की वज़ह से उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ अपनी चूत हिला-हिला कर देने लगी। अब उसे मज़ा आने लगा था और वो ख़ुद बोल रही थी… ज़ोर से चोदो मुझे, और ज़ोर से, फाड़ दे आज मेरी चूत, बुझा दे आज इसकी प्यास… फाड़ दे साली चूत को और ज़ोर से…

मैं भी उसकी बात सुनकर जोश में आकर ज़ोरों के झटके मारने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे कुतिया बना कर उसकी चुदाई की। लगभग २५ मिनटों की चुदाई के बाद वो झड़ गई, और उसके २ मिनट बाद मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में चुदाई करनी शुरु कर दी। और अन्त में मैं भी उसके मुँह में झड़ गया। उसने फिर मेरे लण्ड का सारा पानी पी लिया और मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।

उसके बाद हम दोनों किचन से निकल करक साथ में नहाने चले गए। नहाने के बाद मैंने उसे अपना मोबाईल देकर कहा कि अपने घर फोन करके कह दो कि आज तुम मैडम (जिसके घर वह काम करती थी) के यहाँ रुकोगी, क्योंकि उनके पति घर पर नहीं हैं, तो उन्होंने मुझे आज रात यहीं रुकने को कहा है। उसने घर पर यही बता दिया। उसके घर वालों को कोई आपत्ति नहीं थी।

हमने होटल से खाना मँगवा कर खाया। उसके बाद फिर दोनों नंगे ही बिस्तर पर सो गए। रात में मैंने उसकी चार बार चुदाई की और एक बार गाँड भी मारी। पर सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे उसकी गाँड मारने में आया था… उस रात की चुदाई के बाद वो जब भी मुझसे बात करती तो यही कहती कि अब आपकी तबीयत कब ख़राब होगी??? और मैं जब भी अपने फ्लैट पर अकेला होता तो उसे किसी ना किसी बहाने बुलाकर चुदाई का खेल खेलता।

Meri nayye naukrani aur mein

dosto mein rocky aaje mein aapko yeh meri nayee naukrani ki chudai ki kahani lekar aaya hu.Koii 6 maheene paheele mere ghar main 1 naayi naukaraanee aai hui thi. Us ko meree saalee ne bhejataa. Us kee umar 18 saal hai. Us kaa naam munnee hai. Rang se to vo koii khaas nahee hai par us kaa muskee rang us kee sexy figure par bahut fakra hai vo 5‚6″ kee hai dubalee patalee. Us kee figar 34 24 36 hai. Vo salavaar kameeza pahintee hai. Doston kan kee main akelaa hoon.

Jab vo kaam par aatee to main us ko akele main kaam karane detaa. Kaaphaee baar us kee maa basntee ne bhee mere ko dekhaa kee main koii us ke saath harakat to nahee kar rahaa hoon. Mere ko pataa thaa kee usakee maa mere par vishvaas nahee kar sakatee kyu kee vo mere ko jaanatee bhee nahee hai. Is lie main munnee ko akele main kaam karane detaa aur time time par us ko koii naa koii gifṭ detaa.

Main shuru ke din se hee us ko chodanaa chaṭaa thaa. Par jaldee main nahee thaa. Main kisee aise mauke kee talaash main thaa jis se kee us kee maa ko shaqa naa ho. Kabhee kabhee main munnee se poochh bhee letataa kee us kee maa mere bare main kyaa poochhatee hai aur vo kyaa javaab detee hai. Mere ko pataa chal gayaa kee us kee maa ne mere par shaqa karanaa band kar diyaa hai. Munnee ko mere ghar kaam karate koii 2 maheene ho gaye the is beech maine kabhee kabhee munnee ko meraa lund kuchh aise dikhaayaa kee vo yah samajhe kee galatee se us ko dikhaa hai. Main us ko lund dikhaa kar chupake se us kaa rikṣan bhee dekhataa thaa.

Mere ko lagane lagaa kee us ko meraa lund dekhanaa achchhaa laganaa lagaa hai aur aab zaururaat hai 1 achchhe se mauke kee jab main munnee kee chudaayii tasalee se kara sakoon aur us kee maa ko pataa bhee naa chale. Doston 1 muhaavaar hai ” jahaan chaahaa vahaan rahaa ” aisaa hee mere saath huaa. Munnee kee maa ko takaleepha ho gayii us ko hospiṭal jaanaa pada. Raat komunnee kaa baap hospiṭal main rahataa aur munnee ko mere ghar rahanaa paraataa.

Mere ko yah maukaa achchhaa lagaa aur main sochaa kee agar main munnee ko chod nahee sakataa to kan naa main munnee ko lund hee choosaa doon yaa us se muti hee maravaa lunga. So pahilee hee raat ko maine munnio ko aapane saṭaa khaanaa khilaayayor us ko kahaa kee vo mere room main hee so jaaye. Meraa room thanda  thaa aur vo mere room main sone ko ṭaayaraho gayii   Maine raat ko munnee ko tv dikhaayaa aur us se kuchh ghar kee baaten karee mere ko pataa chalaa kee usakaa baap baahut sharaab pitaa hai aur nashe main dono maayii beṭion ko maraataa hai aur kabhee kabhee to vo us kee maa ke saare kaapare far detaa hai aur us se sex karaataa hai. Maine munnee ko bataayaakee main usakee madad karoon gaa aur us kee maake lie kuchh extra paise bhee doongaa. Us ko baaten karate karate maine us ko poochhakarane kebahaane maine aapane paas bitaliyaa aur us kee chuchiyaan bhee dabhaayii.

Shuru main to vo kuchh chaunkee par fir vo adjust hone lagee aur us ko achchhaa bhee lagane lagaa. Maine us se poochhaa me ” munnee tere ko sex  pasnd hai.”munnee ” jee baaboo jee jaab mere pitaajee meree maa ke saath karate hain tab mere ko achchhaa lagataa hai.”me ” to aaj main tere saath karoon?” meraa savaal seedhaa aur saaf thaa.

Us ne haan kar dee vo garam bhee thee. Maine us kee kameeza utaree aur meree bhee shirt utaar dee mere chaatee par baal dekh kar us ko achchhaa lagaa aur us ne us par ungaliyaan feranee shuru kar dee. Maine us kee salavaar aur panty bhee utaar dee aur meraa paajaamaa bhee utaar diyaa meraa lund khnbe kee tarah se kharaa thaa. Maine us ko lund paakar kar us par hathelee chalaane ko kahaa us ne expert kee tarah se meree muti maaree.

Fir us ne meraa lund choosaa. Thodee der main maine us ko farsh par liṭaayaa aur usakee dono ṭaangeb failaa kar us kee chut par aapanaa lund rakhaa aur usase poochhaa “munnee toone kisee se chudaayii karavaayii hai kyaa ? “munnee “nahee jee maine chudaayii nahee karavaayii par meree maa aur baap kee chudaayii dekhee hai is lie mereko pataa hai. “bas fir kyaa thaa maine meraa lund us kee chut par rakh kar us kee chut main jor se dhakkaa maaraa aur us kee chut faṭ gayii vo zaor se chillayii. Munnee ” babuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu jeeiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii meree faṭ gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii main maar gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Ufafafafafafpha ahaayaaaaaaaa ooooeeeeiiii maayaaaaaaaaaaaaaaaaaa” karaatee rahee par main ananan faanan main us kee chut main 10 – 15 dhakke maare aur saaraa lund us kee chut main de diyaa.

2 shoṭs ke baad hee mere ko pataa chal gayaa kee us kee chut main se bleeḍaing shuru ho gayii hai. Meraa lund us kee chut main fasaa huaa thaa aur bahut tight lag rahaa thaa , par main rukaa nahee aur us kee chudaayii karaataa rahaa thodee der main us kaaronaa mastee kee kilakaareeon main badal gayaa aur vo mastee main sisakane lagee” ahaayaaaaaaa baabh jeeiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ahaaayaa majaayaaayaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaa rahaa hai joer se baabh jeeiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ahaayaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa ” karaatee huii us kee chut ne paanee chor diyaa. Meraa bhee paanee nikal gayaa aur maine us kee ṭaangon ko seedhaa kiyaa aur us ke upar leṭ gayaa main bhee paseene main taar thaa bahut tight chut kee chudaayii ke baad main us ke upar letaa rahaa us kee sasen bhee zaor se chal rahee thee aur meree bhee.

Fir usake thodee der ke baad main us ko baatharoom main le gayaa aur vahaan ham dono ne baat liyaa fir us ko maine bed par chodaa , us raat maine munnee kee 3 baar chudaayii karee. Soobah meraa saaraa kaam karane ke baad jab vo jaane laagoo to maine us ko 2000 rs die. Is tarah se main munnee ko 10deeno tak lagaataar chodataa rahaa aur vo mere lund klaa mazaa letee rahee fir us kee maa kee hospiṭal se chhuṭṭee ho gayii par main ab bhee us ko kabhee kabhee chodataa hoon.

पैसे के आभाव में मेरी चूत का फालूदा

प्यारे पाठको जिंदगी कभी कभी इन्सान को एसे मोड़ पर ला कर खड़ी कर देती है की हम चाह कर भी कुछ नही कर पाते कुछ येसी ही घटना मेरी जिंदगी में भी घटी वैसे मेरी कहानी बड़ी अजीब है। आज से 4 साल पहले की बात है मेरी शादी हुई, शादी के बाद मेरे पति की पारिवारिक आर्थिक हालत खराब चलने लगी।
उस वक्त मेरे पति का काम-धन्धा नहीं चल रहा था। मैं एक नई-नवेली दुल्हन थी, पर पति को परेशान देखती तो मुझे दु:ख होता।
मैं पूछती तो वे टाल जाते, मुझसे कहते- सब ठीक हो जाएगा.. तुम चिंता मत करो !
पर उनकी परेशानी बढ़ती ही जा रही थी, रात देर से आना, मेरी चुदाई कभी करते, कभी नहीं..! मैं चुदाने के लिए बेकरार रहती।
एक दिन मैं रात में जिद कर के पूछने लगी, तो बोले- मुझे घाटा हो गया है !
तो मैं बोली- सब ठीक हो जाएगा !
तो वो बोले- कुछ ठीक नहीं होगा… मेरे पास पूंजी नहीं है..!
मैं बोली- गहने बेच दो..!
तो बोले- नहीं.. कुछ उपाय करूँगा… तुम चिंता मत करो..!
मैं बोली- चिंता क्यूँ न करूँ.. नई-नवेली दुल्हन हूँ.. आप मुझे छोड़ कर गायब रहते हो, मुझे आपकी बाँहों का सहारा चाहिए…. मैं रातभर आपके साथ रहना चाहती हूँ..!
तो बोले- सब ठीक हो जाएगा..!
वो मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे थे, तो मैं गुस्से से बोली- मेरी जवानी को बर्बाद मत करो… मुझे सुख चाहिए…!
तो उस समय तो वे मुझे प्यार करके सो गए पर उनके दिमाग में कुछ कीड़ा कुलबुलाने लगा।
कुछ दिन बाद वे बोले- चलो, आगरा चलना है… तुम पैकिंग कर लो…!
तो मैंने सोची कि शादी के बाद तो परेशान थे, शायद मेरा और अपना दिल बहलाने के लिए आगरा मुझे भी ले चल रहे होंगे।
मुझे लगा मेरे गुस्से की वजह से तो नहीं ऐसा कह रहे हैं…!
तो मैं बोली- तुम परेशान हो.. आगरा जाओगे, पैसा खर्च होगा… रहने दो… मैं यहीं खुश हूँ..!
तो वो बोले- नहीं.. बस आगरा पहुँचना है… सब इंतज़ाम हो जाएगा..!
मैं बोली- कैसे…! आगरा में कोई जादू होगा..!
तो बोले- ऐसा ही कुछ समझो…!
उनकी बात मेरी समझ में नहीं आई।
फिर मैं तैयार हो गई।
इतनी जल्दी प्रोग्राम बना था कि वगैर ट्रेन के रिजर्वेशन ही आगरा जाना पड़ा।
स्टेशन के रास्ते में बोले- आगरा में मैं एक दोस्त राजू के बुलाने पर जा रहा हूँ… उसने बोला है कि भाभी को लेकर आगरा आ जाओ… पैसा मैं कमवा दूँगा…!
मैं बोली- मेरे जाने से क्यों… तुम भी जाते तो भी पैदा हो जाता…!
तो बोले- दोस्त बोला है… भाभी को जरूर लाना है…!
इतने में रेलव स्टेशन आ गया। प्लेटफार्म पर भीड़ थी। वाराणसी के प्लेटफार्म नम्बर 9 से मरुधर एक्सप्रेस से जाना था। पति टिकट लेकर आए, हम लोग ट्रेन में बैठ गए।
देखते ही देखते ट्रेन में भीड़ हो गई। एक लड़का जो मेरे पास बैठा था, वो मुझे लगातार घूर रहा था, मुझे उसका घूरना अच्छा लग रहा था।
ट्रेन में भीड़ बढ़ती जा रही थी, मैं तो सेक्स के मामले मे बहुत तेज हूँ। मैं निगाह बचा कर मुस्कुरा कर उसको मूक निगाहों से आमंत्रित कर रही थी। मेरी इस अदा से वो मेरे चूतड़ों को बगल से छू रहा था।
मुझे मज़ा आने लगा।
मेरे पति ने कहा- तुम ऊपर बैठ जाओ..!
उन्होंने मुझे ऊपर वाली बर्थ पर भेज दिया।
तभी ऊपर एक आदमी मेरे पति से बोला- तुम भी ऊपर आ जाओ..! मैं नीचे आ जाता हूँ।
तो मेरे पति बोले- नहीं.. ठीक है, तब तक जो मेरे बगल मे लड़का नीचे था।
वो बोला- भाई साहब आप आ जाओ… मैं ऊपर आ जाता हूँ।
वो लड़का ऊपर आ गया। मैंने एक चादर बिछा ली और आराम से बैठी थी। रात के 9 बज चुके थे। एकाएक उस लड़के ने मेरी चूत को सहला दिया।
मैं फुसफुसाई- कोई देख लेगा..
तो बोला- कोई नहीं देखेगा !
इतना कहते ही वो भी समझ गया कि मैं राज़ी हूँ। वैसे भी मैं कई दिन से चुदी नहीं थी।
वो धीमे से एक उंगली मेरे चूत में डाल कर आगे-पीछे करने लगा और मैं गर्म होती जा रही थी। फिर वो एक रुमाल की आड़ देकर लण्ड निकाल कर दिखाया, तो मैं मस्त हो गई। उसका ‘छानू’ बहुत मोटा था।
मैंने सब की निगाह बचा कर एक बार पकड़ कर छोड़ दिया पर अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
वो फुसफुसाया- चुदोगी..!
मैं बोली- यहाँ कहाँ..!
तो बोला- चलो बाथरूम..!
मैं बोली- बाथरूम नहीं.. कोई देख लेगा ऐसे ही ठीक है..!
मैंने अपने ऊपर कंट्रोल किया, फिर मज़ा लेती रही। ट्रेन तेज रफ्तार से चली जा रही थी। उसने मेरी चूत को पानी-पानी कर दिया।
मैं उसके लण्ड को मुठिया रही थी। तभी उसके लण्ड ने पानी फेंक दिया, वो शान्त हो गया।
मैं भी ठीक से बैठ गई। वो लड़का लखनऊ में उतर गया, मैं देखती रह गई… उससे ना चुदाने का मलाल था।

खैर हम आगरा स्टेशन पर उतरे, पति से बोली- अब कहाँ चलना है?
तो बोले- फोन लगाता हूँ..!
पति ने फोन लगा कर बात की, उस आदमी ने एक पता बताया कि यहाँ आ जाओ।
पति ने फोन काट दिया, तो मैं बोली- यह कैसा दोस्त है, जो बुला कर लेने नहीं आया… और मैं आप के सभी दोस्तों को जानती हूँ। आगरा में आप के इस दोस्त को मैंने पहले कभी नहीं देखा है।
तो पति बोले- यह नेट के थ्रू मिला है…
फिर मुझे कुछ शक हुआ, मैं भी पढ़ी-लिखी हूँ, एमए (इंग्लिश) हूँ।
मैं बोली- तो वो मुझे कैसे जानता है..!
वे बोले- तुम्हारे चाहने से ही अब सब ठीक होगा..!
मैं बोली- मेरे चाहने से कैसे..!
तो बोले- सब तुम्हारे हाथ में है..!
यह कह कर मेरे पति रोने लगे।

अबराम ने पहली बार में उद्घाटन कर दिया

मै जन्नत खान आज एक और कहानी आप लोगो के लिए लिख कर भेज रही हूँ मेरी पिछली कहानियो की प्रतिक्रियाये अभी भी आ रही है मै और मेरी सहेलिय भी अपनी अपनी कहानियां लिखने में लग गयी है उनकी भी कहानिया जल्द ही मिलेगी आप सब पढ़ते रहिये altsexstories.नेट कार में मैं और समीर अन्जान थे, पर अबराम और नरेश अपनी गर्ल-फ़्रेन्ड्स के साथ थे। चूंकि कार समीर की थी सो उसे तो साथ आना ही था। मुझे तो निशा ने कहा था। नैना नरेश के साथ थी। कार कच्ची सड़क पर हिचकोले खाती हुई चल रही थी। पीछे बैठे मन्जू और नैना अबराम और नरेश के साथ बड़ी ही बेशर्मी से अश्लील हरकतें कर रही थी। उन्हें देख कर मेरे मन में भी गुदगुदी होने लगी थी। पर मन मसोस कर चुपचाप बैक-मिरर से उनकी हरकतें देख रही थी।
तभी एक गार्डन जैसे स्थान पर समीर ने गाड़ी रोक दी। साथ में लगी हुई नदी बह रही थी। दूर दूर तक कोई नहीं था। हमने कार में से दरियां निकाल कर उस जन्गल जैसी जगह में बिछा ली। सारा सामान निकाल कर एक जगह लगा दिया। थर्मस से चाय निकाल कर पीने लगे। तभी नरेश और अबराम ने अपने कपड़े उतार दिये और मात्र एक छोटी सी अन्डरवियर में आ गए। दोनों ने ही नदी में छलांग मार दी…
निशा और नैना भी पीछे पीछे हो ली। चारों पानी में उतर गये और खेलने लगे। बस मैं और समीर वहां रह गये थे। मैं तो जैसे उन सभी के बीच साधारण सी लग रही थी। ढीला ढीला कुर्ता पजामा, कहीं से कोई भी अंग बाहर नहीं झांक रहा था। इसके उलट मैना और
तो अपनी छोटी छोटी स्कर्ट में अपना जैसे अंग प्रदर्शन करने ही आई थी। कुछ ही देर में नदी में छपाक छपक की आवाजें बन्द हो गई। दोनों ही जोड़े पानी के अन्दर कमर तक एक दूसरे के साथ अश्लील हरकतें करने लगे थे। 
“जन्नत उधर मत देखो … वो तो है ही ऐसे ! यही करने तो आए हैं यहाँ ये सब !” समीर ने मुझसे कहा।
“जी… जी हां… वो …” मेरे विचारों की श्रृंखला टूट गई थी, मेरे मन की गुदगुदी जैसे भंग हो गई।
“आओ , अपन उधर चलते हैं !”
मैं उसके साथ चुपचाप उठ कर चल दी। एक झाड़ी के झुरमुट के पीछे खड़े हुये ही थे कि अबराम और नैना नदी में उसी तरफ़ एकांत देख कर छुपे हुये थे। नैना ने अबराम का लण्ड पकड़ा हुआ था और उसकी स्कर्ट नैना के चूतड़ से ऊपर थे जिसे अबराम बेरहमी से दबा रहा था। उसे देख कर मेरा दिल जोर से धड़क उठा। समीर भी हतप्रभ सा रह गया। हम दोनों की नजरें जैसे उन पर जम गई। तभी मुझे अहसास हुआ कि समीर मेरे साथ में है।

मैंने घबरा कर समीर की तरफ़ देखा। समीर अभी भी ये दृश्य देख कर सम्भला नहीं था। समीर का लण्ड जैसे अपने आप करवटें लेने लगा। समीर ने मेरी तरफ़ देखा… मेरी नजरें अपने आप झुक गई। मेरा मन भी डांवाडोल हो उठा। जवानी का तकाजा था… मेरा चेहरा लाल हो उठा। समीर की नजरों में लालिमा उभर आई। नैना और अबराम की अश्लील हरकतों से मेरी जान पर बन आई थी। लाज से मैं मरी जा रही थी।
“जन्नत, यह तो साधारण सी बात है, दोनों जवान है, बस मस्ती कर रहे हैं !”
“ज़ी… नहीं वो बात नहीं … ” मैंने झिझकते हुये कहा। मेरे चेहरे पर पसीना उभर आया था। उसने पीछे से आकर मेरी बाह पकड़ ली। मेरा जिस्म पत्ते की तरह कांप गया। मैंने अपनी बांह उससे छुड़ाने की कोशिश की।
मेरा मन एक तरफ़ तो समीर की हरकतों से प्रफ़ुल्ल हो रहा था… तो दूसरी तरफ़ डर भी रही थी। मैंने सोचा कि अगर मैं समीर को छूट दे दूं तो वो फिर मुझे चोदने की कोशिश करेगा। बस यह बात दिल आते ही मेरा दिल धाड़ धाड़ करने लगा। उसी समय मुझे लगा कि समीर का हाथ मेरे कमर के इर्द गिर्द लिपट गया। मेरा अनछुआ शरीर पहली बार कोई अपनी बाहों में भर रहा था। 
“ऐसे मत करिये जी… मैं मर जाऊंगी !”
“जन्नत, यहां हमें कोई नहीं देख रहा है, बस एक बार मुझे किस कर लेने दो !”
“क्…क्…क्या कह रहे हो समीर… मेरी जान निकल जायेगी… हाय राम !”
मेरे ढीले ढाले कुर्ते पर उसके हाथ फ़िसलने लगे। उसका एक हाथ मेरे बालों को सहला रहा था। मुझे जैसे नींद सी आने लगी थी।
“अम्मी… हटो जी… मुझे मत छुओ … ” मेरी सांसे तेज हो गई। शर्म के मारे मैं दोहरी हो गई। उसके हाथ अब मेरी छोटी छोटी चूंचियों पर आ गये थे जो पहले ही कठोर हो गई थी। निपल जैसे कड़े हो कर फ़टे जा रहे थे। उसके हाथों तक मेरे दिल की धड़कन महसूस हो रही थी। शरीर में मीठा मीठा सा जहर भरा जा रहा था। उसके अंगुली और अंगूठे के बीच मेरे निपल दब गये। उसे वो हल्के से मसल रहा था। मेरी सिसकियां मुख से अपने आप ही निकल पड़ी। मन कर रहा था कि बस मुझे ऐसा मजा मिलता ही रहे। दिल की कोयलिया पीहू पीहू कर कूक उठी थी।उसका मैंने जरा भी विरोध नहीं किया। मैंने पास के पेड़ के तने से लिपट गई। उसका हाथ अब मेरे छोटे से चूतड़ो पर था। ढीले पजामे में मेरे चूतड़ के गोले नरम नरम से जान पड़े… कैसी मीठी सिरहन पैदा हो गई। मैं ऊपर से नीचे तक सिहर उठी।

“चलो, वहीं चल कर कर बैठते हैं … वो दोनों तो अपने आप में खोये हुये हैं। मैंने शरम से झुकी अपनी बड़ी बड़ी आंखे उठा कर समीर को देखा… उसका लण्ड बहुत जोर मार रहा था। उसके हाल पर मुझे दया भी आई… मेरी हालत भी सच में दया के काबिल थी…। हम दोनों वापस दरी पर जाकर बैठ गये। वहां कोई नहीं था, शायद वो चुदाई में लगे थे। उनकी चुदाई के बारे में सोच कर ही मुझे शर्म आने लगी थी। 

कॉलगर्ल- द मराठी सेक्स कथा

मित्रा हि गोष्ट आहे मला जेव्हा कळले कि माझी पत्नी एक वेब्क्याम मोडेल आहे. मी संध्या सोबत ३ वर्षांपासून बाहेर जात होतो. आणि गोष्टी एकदम मस्त चालल्या होत्या. किंवा असे मला वाटत होते. ती फाक्त २१च वर्षांची होती. आणि तिचे शरीर गरम-गरम होते आणि तिला पहिले कि मला लवकरच उत्तेजित झाल्यासारखे वाटत असे. आम्ही बंगलोर मध्ये फ्लात मध्ये राहत होतो. ती पार्ट-टाईम काम करत होती. आणि मी ट्रान्सपोर्ट मध्ये काम करत होतो. सारे काही व्यवस्थित होते जेव्हा माझ्या एका मित्राने मला सांगितला त्यांनी आमच्या फ्लात च्या बाजूला कोणालातरी पहिले आहे. आणि त्यांना त्यांनी ओळखले नाही. मी सुधा काही लोकांना पहिले, पण मग विचार केला कोणी चोर उच्चाके लोक असतील. आणि फारसे काही घरातून सुधा हरविले न्हवते. मग
मी विचार केला काय आहे ते शोधावे. माझ्या कडे एक जुना लपटोप होता आणि त्याला एक वेबक्याम जोडलेला होता. मी त्यावर एक सोफ्टवेअर टाकला होता आणि तो पूर्ण घडामोडी रेकोर्ड करत असे. आणि जेव्हा मी घरी जात असे तेव्हा त्या सर्व गोष्टी मी रेकोर्ड करत असे. मग मी ठरविले ह्या सर्व गोष्टी मी संध्याला सांगणार नाही. कारण ती नेहमी म्हणत असे कि मी ह्या सर्व गोष्टींसाठी जास्त बाऊ करून घेतो. |
मंगळवारी मला खूप काम होते आणि मला ११ वाजेपर्यंत वेळच मिळाला नाही. संध्या आधीच झोपून गेली होती. त्यामुळे मी थंडच जेवण केले. आणि मग मी पटकन वेब्क्याम कडे लक्ष द्यावे म्हणून पहिले. मग मी जेव्हा तो उघडला तेव्हा मला मेल्या सारखे झाले. त्या मध्ये संध्या एका मानासोबत फ्लात मध्ये येत होती. आणि ते आत आल्याबरोबर तो माणूस तिच्या अंगावर तुटून पडला आणि तो तिच्या स्कर्ट वर आणि वरच्या टोपवर हात फिरवत होता. तिचे स्तन चाचपडत होता. आणि तिचे कपडे ओढत होता. आणि मग ती पायावर बसून त्याचा कॉक चोखत होती. मला खूप वेगळेच वाटत होते. एका बाजूला खूप राग येत होता तर कारण माझी पत्नी मला फसवत होती आणि एकीकडे मला उत्तेजित वाटत होते. मग काही वेळातच ते बेडरूम मध्ये चालले गेले आणि ते क्यामेर्याच्या दृष्टीच्या बाहेर गेले होते. मग पुढचा शोत मला दिसला जेव्हा त्या मुलाला माझी पत्नी बाय बाय करत होती, त्या वेळेस तिच्या अंगात फाक्त टी-शर्ट होता आणि दुसरे काहीच न्हवते. मग मी ठरविले कि बेडरूम मध्ये एक दुसरा क्यामेरा बसवावा. आणि विचार केला हे शोधावे कि हि आजून काय काय करते. |
मग पुढच्या काही दिवस काही वेगळेच झाले नाही. पण मी ह्या गोष्टीवर विश्वास ठेवू शकत न्हवतो कि संध्या माझ्या समोर एकदम शांत पणे होती आणि माझ्या मागे ती वेब्क्याम मोडेल सारखी होती. मग गुरुवारी अजून एक गोष्ट झाली. च्या सुमारास संध्या आली आंणी तिने समोरचा दरवाजा उघडला आणि तिने अजून दोन माणसाना आत घेतले ते तिच्या बाजूला बसले आणि त्यांनी एक तास भर पिण्याचा कार्यक्रम केला आणि त्यांनी मग संध्याचा स्कर्ट काढावयास सुरुवात केली. मग तिने त्यांना कीस केले. मग काही वेळच त्या दोघांनी तिला बेड रूम मध्ये नेले आणि त्यांनी तिला पकडले आणि मग तिला चोदावयास सुरुवात केली. ती एखाद्या वेब्क्याम रंडी सारखी दिसत होती आणि ते वारंवार तिच्या पुसीवर जात होते आणि मग त्यांनी पाणी सोडले.
मग पहिला मुलगा आत आला आणि तिच्या पुसी च्या आत गेला आणि दुसरा तिच्या बुब्सवर स्वताचे वीर्य टाकत होता. मला ते पाहून प्रथम वाईट वाटले आणि ते पाहून मी उत्तेजित वाटले. मग त्या रात्री मी शांतपणे झोपव्याच्या ऐवजी तिला न उठविता सर्व पडदे खाली टाकले आणि तिची पुसी उघडून पाहू लागलो आणि ती उठाव्याच्या आईवजी मी तिच्या पुसी मध्ये बोट घालून कॉक तिच्या तोंडात दिला. तिला खूप आशर्य वाटले परंतु ती लगेचच ती ओली झाली. मग त्या रात्री मी तिला अश्या पद्धतीने संभोग केला जसे कधी आधी संभोग केलाच न्हवता. मग मी तिला त्या सर्व पोझिशन मध्ये ट्राय केला तिच्या नित्माबावर चपात मारल्या आणि तिला रंडी सुधा म्हणालो. मग मी हे मान्य केले कि माझी पत्नी वेब्क्याम रंडी होती. आणि प्रत्यक वेळेस ती घरात दुसर्या लोकांना चोदत असे तेव्हा मजाह वेब्क्याम ते सर्व रेकोर्ड केले होते | समाप्त

मेरी नौकरानी मधुरिमा ने मोटा लंड देख लिया

दोस्तों | मेरे नाम शेखर वैरांगने है और मैं नागपुर का रहने वाला हूँ | हमारे घर में एक नौकरानी है जिसका नाम मधुरिमा है | मधुरिमा को हमारे घर वाले गाँव से लाये थे | उसकी उम्र मेरे बराबर ही थी, और हम दोनों एक साथ ही जवान हुए थे |अब हम दोनों १९ साल के थे, और मधुरिमा का बदन एकदम खिल चूका था | उसकी चूचियां काफी बड़ी और चुतड एकदम मस्त हो गए थे | मैं भी जवान हो चूका था और दोस्तों से चुदाई के बारे में काफी जान चूका था, पर कभी किसी लड़की को चोदने का मौका नहीं मिला था | मधुरिमा हमेशा मेरे सामने रहती थी जिसके कारण मेरे मन में मधुरिमा की चुदाई के ख्याल आने लगे | जब भी वो झाड़ू- पोछा करती तो मैं चोरी- चोरी उसकी चुचियों को देखता था | हर रात मधुरिमा के बारे में ही सोच सोच कर मुठ मरता था | मैं हमेशा मधुरिमा को चोदने के बारे में सोचता था पर कभी न मौका मिला न हिम्मत हुई | एक बार मधुरिमा ३ महीनो के लिए अपने गाँव गयी, जब वो वापस आयी तो पता चला की उसकी शादी तय हो गयी थी | मैं तो मधुरिमा को देख कर दंग ही रह गया | हमेशा सलवार-कमीज़ पहनने वाली मधुरिमा अब साड़ी में थी | उसकी चूचियां पहले से ज्यादा बड़ी लग रही थी, शायद कसे हुए ब्लाउज के कारण या फिर सच में बड़ी हो गयी थी |उसके चुतड पहले से ज्यादा मज़ेदार दिख रहे थे, और मधुरिमा की चल के साथ बहुत मटकते थे| मधुरिमा जब से वापस आयी थी उसका मेरे प्रति नजरिया ही बदल गया था | अब वो मेरे आसपास ज्यादा मंडराती थी | झाड़ू-पोछा करने समय कुछ ज्यादा ही चूचियां झलकती थी | मैं भी मज़े ले रहा था , पर मेरे लंड बहुत परेशान था, उसे तो मधुरिमा की बूर चाहिए थी | मैं बस मौके की तलाश में रहने लगा | कुछ दिनों के बाद मेरे मम्मी-पापा को किसी रिश्तेदार की शादी में जाना था, एक हफ्ते के लिए | अब एक हफ्ते मैं और मधुरिमा घर में अकेले थे | हमारे घर वालो को हम पर कभी कोई शक नहीं था, उन्हें लगता था की हम दोनों के बिच में ऐसा कुछ कभी नहीं हो सकता | इसलिए वोह निश्चिंत होकर शादी में चले गए |

जब मैं दोपहर को कॉलेज से वापस आया तो देखा की मधुरिमा किचन में थी | उसने केवल पेटीकोट और ब्लाउज पहना था | उसदिन गर्मी बहुत ज्यादा थी और मधुरिमा से गर्मी शायद बर्दास्त नहीं हो रही थी | मधुरिमा की गोरी कमर और मस्त चूतड़ों को देख कर मेरे लंड झटके देने लगा | मैं ड्राविंग रूम में जाकर बैठ गया और मधुरिमा को खाना लाने को कहा | जब मधुरिमा खाना ले कर आयी तो मैंने देखा की उसने गहरे गले का ब्लाउज पहना है जिसमे उसकी आधी चूचियां बाहर दिख रही थी | उसकी गोरी गोरी चुचियों को देख कर मेरा लंड और भी कड़ा हो गया और मेरे पैंट में तम्बू बन गया | मैं खाना खाने लगा और मधुरिमा मेरे सामने सोफे पे बैठ गयी |

भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू-6

मै राहुल आज  भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू का तीसरा भाग लिख रहा हूँ | अभी तक आपने पढ़ा…. सिमरन की चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया और उसके पैर खड़े खड़े काँपने लगे और वह बुरी तरह इस्खलित हो गई. इधर किशन ने भी अपने लंड से ढेर सारा जूस छ्चोड़ दिया जिसे दोनो ननद भाभी पूरा का पूरा चाट गई. इस तरह एक जोरदार चुदाई करके तीनो नंगे होकर एक दूसरे से चिपक कर बेड पर लेट गये, और सिमरन लंबी लंबी साँसे लेती हुई अपने बेड पर आकर धम्म से गिर गई. और आगे ….

रोज की तरह सुबह सुबह सभी लोग बैठ कर चाय पी रहे थे, आकृति बिल्कुल नॉर्मल लग रही थी और काफ़ी खुश नज़र आ रही थी, किशन और संध्या दोनो अंदर से थोड़े व्याकुल थे लेकिन नॉर्मल होने का दिखावा कर रहे थे, जबकि सिमरन का चेहरा काफ़ी तनाव से भरा था और वह किशन, संध्या और आकृति के चेहरो पर कुछ खोजने की कोशिश कर रही थी, किशन और संध्या, सिमरन की व्याकुलता को भली भाती समझ रहे थे लेकिन दोनो मे से कोई भी कुच्छ कहना नही चाह रहा था, तभी आकृति ने सिमरन से पुछा मा आज क्या खाना बनाना है, सिमरन तेरी भाभी और तू दोनो मिलकर डिसाइड कर लो और इतना कह कर चुप हो गई, अब उसके चेहरे पर एक जलन पैदा करने वाले भाव नज़र आ रहे थे, संध्या और किशन दोनो उसके चेहरे को पढ़ चुके थे, तभी संध्या उठ कर किचन की ओर जाने लगी और उसने धीरे से किशन को आने का इशारा किया, थोड़ी देर बाद किशन उठ कर संध्या के पास किचन मे चला गया, क्या बात है भाभी, किशन तुमाहरी मा हम लोगो से मन ही मन खफा है, हाँ भाभी वो तो मुझे भी लग रहा है पर अब क्या करे भाभी कही मा ज़्यादा नाराज़ ना हो जाए, संध्या अरे उनका गुस्सा इस बात का नही है कि हम लोग ग़लत काम कर रहे थे, बल्कि उनका वो जलन के मारे हमसे गुस्सा कर रही है, तो फिर अब क्या करे भाभी, किशन जा कर अपनी मा को पटाओ, उसको थोड़ा तेल लगाओ, तुम्हारी तारीफ से वह तुरंत पट जाएगी, और तुम्हारा काम बनने मे आसानी रहेगी, या ये समझ लो कि अब तुम्हारी मंज़िल दूर नही, किशन भाभी की बात समझ गया और बाहर

चला गया, सिमरन बाहर खड़ी होकर पास वाली किसी आंटी से बाते कर रही थी, तभी आकृति भी भाभी के पास किचन मे चली गई किशन आकृति को जाते हुए देख रहा था घोड़ी आज जीन्स पहनकर अपनी गांड मटका रही थी, किशन भी उठ कर किचन की ओर चल दिया और अंदर जा कर अपनी भाभी संध्या और बहन आकृति के पास जाकर दोनो मस्तानी घोड़ियो के एक एक दूध को पकड़ कर मसल्ने लगा, यह एक सेक्सी नज़ारा था कि एक ही मर्द दो दो औरतो की टोटल चार चुचियो को एक साथ मसल रहा था क्या किस्मत पाई थी हमारे किशन बाबू ने, तभी आकृति ने किशन को पकड़ कर बाहर धकेलते हुए, रात भर चोदा है फिर भी पेट नही भरा, अभी मा देख लेगी तो सब गड़बड़ हो जाएगी, और दोनो ननद भाभी खिलखिला कर हास पड़ी किशन जब किचन से बाहर आया तो उसने देखा कि उसकी मम्मी बालकनी मे अपनी गांड उठाए रलिंग पर झुक कर खड़ी है, तब उसके कदम अपनी प्यारी मम्मी की ओर चल दिए, किशन लपक कर मा के पास गया और पीछे से मा मा कहता हुआ संध्या के मोटे मोटे चूतादो से चिपक गया, और आगे हाथ लेजा कर अपनी मा की मोटी चुचियो को भींच लेता है, सिमरन थोड़ा नखरा करते हुए बड़ा प्यार जाता रहा है अपनी मा से, ओ मा तुमसे प्यार नही जताउन्गा तो किस से प्यार जताउन्गा आख़िर तुम मेरी प्यारी मा हो और सिमरन के गोरे गालो को चूम लेता है, सिमरन बिगड़ते हुए चल रहने दे दो दो दिन मे तुझे अपनी मा की याद आती है, बाकी

समय पता नही कहाँ कहाँ प्यार जताता रहता होगा |

किशन अपनी मा को जलते देख कर मन ही मन खुश होता हुआ अपनी मा को अपनी तरफ घुमा कर अपने सीने से लगता हुआ उसकी चुचियो को अपनी छाती से दबा देता है, ओ मा तुमहरे सिवा मैं किसी से प्यार ही नही करता तो फिर किससे प्यार जताउन्गा, और पीछे हाथ ले जाकर अपनी मा के मोटे चूतादो के दोनो पाटो को दबाते हुए अपने लंड की ओर खींचता है, सिमरन उसे अपने सीने से चिपकते हुए, तो फिर दो दिन से तू अपनी मा के पास क्यो नही आया, क्या तुझे अपनी मम्मी की याद नही आई, किशन प्यार से सिमरन के गले लगते हुए उसके मोटे मोटे चूतड़ सहला रहा था और उसका लंड पाजामे के अंदर खड़ा होकर सीधे अपनी मा की चूत मे ठोकर मार रहा था,

उसकी ठोकर सिमरन भी अपनी फूली हुई चूत और पेडू पर महसूस करने लगी और वह समझ गई कि उसके बेटे का लंड अपनी मा को मसल्ते हुए खड़ा हो चुका है और उसकी चूत मे भी गीलापन होने लगा, किशन ओ मा मेरी ग़लती के लिए मुझे माफ़ कर दे और सिमरन के गालो और उसकी गर्दन को चूमने लगा | सिमरन अब तक गरम हो चुकी थी और उसने किशन को अपने मोटे मोटे दूध से दबाते हुए उसके गालो को चूमने लगी मेरा प्यारा बेटा, तुझे मालूम नही तेरी मा तुझे देखे बिना एक पल नही रह पाती है, ओह मा मैं भी तो तुम्हारे बिना नही रह पता हू, और अपनी मम्मी के मोटे मोटे चूतादो को दोनो हंतो से कस कर दबाता है जिससे किशन का खड़ा लंड सिमरन की चूत मे एक गहरी चुभन पैदा कर देता है, और सिमरन कमरस से भीग कर पागल होने लगती है, सिमरन को किशन से इस तरह चिपकने मे बहुत मज़ा आता है और वह सोचती है कि इस मज़े को और ज़्यादा मजेदार कैसे बनाऊ मेरी चूत तो अपने बेटे के लंड के लिए तड़प उठती है, फिर सिमरन कुछ सोचकर बेटे तू मेरे रूम मे चल, हम मा बेटे वही बैठ कर बाते करेंगे और किशन को लेकर अपने रूम मे आ जाती है, बेटा तू बेड पर बैठ मैं थोड़ा अपने कपड़े चेंज कर लू, आज इस साडी मे काफ़ी गर्मी लग रही है और सिमरन बाथरूम मे जाकर मन ही मन इस साडी ब्लाउस मे तो किशन को मज़ा ही नही आता होगा और सारे कपड़े उतारकर पूरी नंगी हो जाती है, और अपने नंगे बदन पर सिर्फ़ एक पतली सी मॅक्सी पहन लेती है, और फिर मस्तानी चाल चलते हुए किशन के पास आ जाती है किशन अपनी मा को पतली सी मॅक्सी मे देखता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है, उसकी मा की

मोटी मोटी जंघे मॅक्सी से अलग ही नज़र आ रही थी |

सिमरन पास आकर किशन से सॅट कर बेड पर बैठ जाती है, दोनो के चेहरे काम वासना से लाल दिख रहे होते है, सिमरन जब अपनी नशीली कामुक आँखो से किशन को देखती है तो किशन और सिमरन की नज़रे एक दूसरे से कुछ समय के लिए मिल जाती है , और दोनो समझ रहे है कि दोनो के चूत और लंड इस समय पूरी तरह गरम है, किशन अपनी मा से बिल्कुल सॅट जाता है दोनो के मन मे अंदर तूफान उठ रहा होता है और दोनो अपने आप को रोक नही पाते है और एक दूसरे से कस कर चिपक जाते है, इस बार दोनो मे से कोई कुछ नही बोलता है किशन का लंड पेंट फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो जाता है और सिमरन की चूत का पानी बह कर उसकी जाँघो पर रेंगने लगता है,

मॅक्सी के अंदर से पूरी नंगी होने की वजह से किशन को अपनी मा के नरम नरम गदराए बदन का इतना मुलायम एहसास होता है कि वह एक बार तो अपनी मा के मोटे मोटे दूध को अपने हाथो मे भर लेता है और उन्हे दबा देता है सिमरन एक सिसकी लेकर रह जाती है, किशन जानता है कि उसकी मा उससे चुदने के लिए अब व्याकुल है इसलिए उसे अब अपनी मा की चुचि और गांड को बेधाड़क दबा देने का डर नही रहता है, और वो अपनी मा के चेहरे को पकड़ कर अपना चेहरा पास ले जाता है और कहता है मा तुम बहुत सुंदर हो और अपनी मा के रसीले होंठो को चूम लेता है, रिप्लाइ मे सिमरन भी अपने बेटे के होंठो को चूमते हुए, झूठे कही के अपनी मा का दिल रखने के लिए उसे सुंदर कह रहा है ना, किशन नही मा तुम सच मे बहुत सुंदर हो |

सिमरन अच्छा एक बात सच सच बता तुझे आकृति, संध्या और मुझमे सब से सुंदर कों लगता है, किशन अरे मा एक बेटे को दुनिया मे सबसे सुंदर उसकी मा ही लगेगी ना, बेशक दीदी और भाभी बहुत सुंदर है लेकिन तुमसे ज़्यादा सुंदर मुझे इस पूरी दुनिया मे कोई नही लगता है, इसीलिए तो मैं तुमसे इतना प्यार करता हू, तुम तो इतनी प्यारी लगती हो कि तुम्हे तो हर कोई प्यार करना चाहेगा, सिमरन अच्छा मैं देखु ज़रा मैं कहाँ सुंदर हू और खड़ी होकर अपनी मोटी गांड को हिलाते हुए ड्रेसिंग टेबल की ओर जाने लगी, उसकी गांड जो की पूरी मॅक्सी से लगता था कि बाहर आ जाएगी इतनी उभरी हुई लग रही थी और उसके चूतादो के दोनो पाटो के बीच इतना गॅप लग रहा था |  कि जैसे कोई अपने दोनो हाथो से उसके चूतादो के पाटो को विपरीत दिशा मे फैला रखा हो, किशन अपनी मम्मी की ऐसी मस्तानी गांड देखकर पागल हो गया और वह जान गया था कि उसकी मम्मी ने अंदर पेंटी नही पहनी है वह झट से खड़ा हुआ और अपने पाजामे के अंदर हाथ डाल कर अपने लंड को अपने उंडरवेार के छेद से बाहर निकाल लेता है और पाजामे को चढ़ा लेता है, अब उसका लंड मुलायम से पाजामे के जस्ट अंदर नंगा होता है और वह अपना खड़ा लंड लेकर अपनी मा के पास जाता है आकृति अपनी मोटी गांड उभारे मिरर मे अपने हस्न को निहारती रहती है तभी किशन पीछे से जाकर अपनी मा की मोटी गांड से अपना लंड सताकर अपनी मम्मी की मोटी गांड से कस कर चिपक जाता है और अपने हाथो को आगे लेजकर अपनी मा के मोटे दूध थाम लेता है, इस बार सिमरन और किशन के लंड और उसकी मा की गांड की गहरी दरार के बीच सिर्फ़ सिमरन की पतली सी मॅक्सी और किशन के मुलायम से पाजामे का कपड़ा ही होता है, और सिमरन उसके लंड की चुभन बहुत अच्छे से

अपनी गांड पर महसूस करके सिहर जाती है |

सिमरन मिरर के सामने आँखे बंद किए लंड की चुभन का मज़ा लेती रहती है और किशन अपनी मा को पीछे से अपनी बाँहो मे भरे हुए उसके गोरे गालो पर अपने होंठ और गाल रगड़ता हुआ मिरर मे अपनी सेक्शी मा का चेहरा देखता हुआ क्यो मा देख लिया आप कितनी सुंदर लगती हो तब सिमरन अपनी आँहे खोलती है और कहाँ बेटा मैं कहाँ इतनी सुंदर हू पता नही तुझे क्यो सुंदर लगती हू किशन अपनी मा के गालो को चूमता हुआ अरे मा जब बेटा जवान हो जाता है तब उसे उसकी मा एक ना एक बार तो ज़रूर सुंदर लगती है और हल्के हल्के किशन अपनी मा की छातियो के निप्पल पर अपनी उंगलिया चलाता जाता है, सिमरन अच्छा तो क्या मेरा बेटा जवान हो गया है, किशन अपने खड़े लंड को अपनी मा की गांड मे थोड़ा तेज़ी से आगे की ओर दबाता हुआ क्यो तुझे नही लगता की मैं जवान हो गया हू सिमरन थोड़ा कराहते हुए आह हाँ अब लगने लगा है कि मेरा बेटा पूरा जवान हो चुका है, और अपनी दोनो टाँगे थोड़ा सा फैला देती है और किशन थोड़ा नीचे अपनी कमर झुका कर अपने लंड को सिमरन की फटी हुई चूत पर सेट कर लेता है हल्के हल्के अपने लंड का दबाव अपनी मा की खुली हुई चूत पर बढ़ाने लगता है और सिमरन की चूत का पानी मॅक्सी से पीछे तक नज़र आने लगता है किशन के लंड की टोपी लगभग सिमरन की चूत को खोल कर मॅक्सी के उपर से ही उसकी चूत मे घुसी होती है |

सर ने बांध कर पुरी रात चोदा

दोस्तों मेरा नाम मानसी है मै 19 साल की स्लिम लुक्स वाली लड़की हूँ मुझे पोर्न देखना बेहद पसंद है मेरा रंग थोड़ा ज्यादा हि गोरा है। मेरा फिगर 30-28-30 हे। मैं कॉलेज गर्ल हुँ। और दिखने मे बहुत सुंदर यहाँ तक कि मेरी गर्लस कॉलेज कि लड़कीयाँ मुझे आईशा टाकीया कहती हैं। कल रात तक मैंने कभी सेक्स नहीं किया था पर मन में बोन्डेज सेक्स(बंधन सेक्स) कि ईच्छा थी।
पापा मम्मी कल दोपहर तक आने वाले थे। मेरे टयुसन सर कमल 8:00 बजे घर पर आए मैंने तब सेक्सी ड्रेस  पहन रखी थी। वाईट शर्ट और रेड चेक्स मिनी स्कर्ट। सर ने पहले कभी मुझे
ऐसे नहीं देखा था।मेरी चिकनी गोरी जांघों से सर कि नज़र नहीं हट रही थी। हमने पडना चालू किया तभी सर ने पानी मांगा मै पानी लेने गयी सर ने मेरा सेल देखा जिसमें बहुत सारी ब्लू फिल्म थी।मुझसे पुछा ये क्या है मै इसकी शिकायत तेरे से करूंगा। में बहुत डर गयी पर मन ही मन मे सेक्स करना चाहती थी।मैंने कहा सर आप कुछ भी कर लिजिये पर डेडी से मत कहना।लगा सर भी यही सुनना चाहते थे।
सर ने कहा ठीक हैं पर जैसा मैं बोलुंगा वैसा ही करना नहीं तो मै समझ गयी आप मुझे अपना गुलाम समझे
मैंने कभी पहले सेक्स नहीं किया था। इसलिये डर के मारे दिल धड़क रहा था। मैं खड़ी थी सर ने पहले जांघों पर किस किया मै बहुत ज्यादा सेन्सटिव हूँ मुझे जोर कि गुदगुदि हुई सर समझ गये ये मेरा पहली बार है। सर मुझे बेडरूम ले गये और कहा अपनी शर्ट  ऊतारो पर बहुत धीरे-धीरे। मैं अपनी शर्ट शर्माते हुए धीरे-धीरे उतार कर रुक गयी सर
मेरे पिछे आकर गर्दन पर किस किया और बोले मै तुम्हें पुरा नंगा करूंगा पर धीरे-धीरे ये सुनते हि मेरे रोंगटे खड़े हो गये फिर दोनों हाथ उपर कर मेरी कमिज उतार दी अब मेरे बोब्स सिर्फ ब्रा से ढके थे जो डार्क लाल थी मैंने अपने दोनों हाथों से छाती ढक रखी थी और नीचे स्कर्ट बची थी। फिर सर ने मेरे गालों को किस किया फिर  होठों को फिर गर्दन को फिर मेरे दोनों हाथ हटा कर  मेरे बोब्स को ऊपर से किस करने लगे। में  थोड़ी अनकम्फर्ट होने लगी मैंने रोक कर कहा सर सहन नहीं हो रहा है आप मुझे बांध कर जो करना है वो करो मैं आपको रोकुँगी नहीं क्योंकि मैं बहुत सेनसिटिव हूँ।
सर ने तुरंत वहीं किया अलमारी से   कि चार टाई निकाली मेरे दोनों हाथ बेड के ग्रिल से बांध दिए और पेर भी चोडे कर पलंग से बांध दिए बेडरूम कि सारी  लाइट जला दि जिससे मेरा गोरा रंग और ज्यादा उत्तेजित करे सर फ्रीज से सिल्क चोकलेट  ले आए।और कैची भी मेरी स्कर्ट उंची कर पेंटी काट कर अलग कर दि मैंने सुबह ही हेयर रिमुव किए थे।जिससे मेरी सफेद गोरी चिकनी चुत देखकर सर के मुह मे पानी आ गया अब वो मेरी ब्रा काटने लगे मैंने कहा प्लिज मुझे पुरी नंगी मत करो।सर बोले मज़ा तो तब आयेगा जब मे तुम्हारा गोरा नंगा बदन देखुंगा और फिर सर ने  ब्रा और स्कर्ट केची से काट दिए और मुझे पुरा नंगा कर दिया।
मै कभी पहले किसी के सामने पुरी नंगी नहीं हुई थी मुझे बहुत शर्म आ रही थी पर मेरे हाथ बंधे थे।
सर  ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। सर मेरे निपल को चूसते रहे मै रोक नहीं पाई अगर हाथ खुले होते तो मे ये करने से रोक देती और इस गुदगुदाती मस्ती का मज़ा नहीं ले पाती। मेरे मुह से सिस्किया निकल रही थी। सर ने धीरे से निपल पर काटा भारी उत्तेजना और मिठे दर्द से निकला, “ओ मम्मी नहीं “ये सुन कर कमल सर का पहले से खड़ा लंड और उत्तेजित हो गया वो पुरे बदन पर  चॉकलेट से मल कर चाटने लगे।मैं उपरी मन से मना करती रही।
वो चाटते हुए नीचे गये और नाभि को किस करने लगे। मुझे लगा कहीं ये मेरी चुत को किस ना कर ले क्योंकि वो हिस्सा बेहद सेनसेटिव था।
सर ने मेरी जांघों पर किस करना चालू किया तो मेरी हालत खराब हो गयी मैं अपने पाव समेटना चाहती थी पर सर ने मेरे दोनों पाव बेहद कस कर बांधे थे। मे केवल छटपटाती रह गयी।
मुझे लगा मेरा निर्णय सही था। अगर मे खुलीं होती तो ये सब नहीं करने देती और ये मज़ा मन मे हीं रह जाता।
और लास्ट मै मेरी कि बारी आई।।  रहा था। कमल सर ने अपना सिर दोनों जांघों के बीच रख कर दोनों हाथों से जांघों को कस कर जकड लिया    ताकि मे हिल ना सकु ओर सिधे हि अपनी लंबी जुबान चुत  मे बहुत अंदर तक डाल दी बहुत गुदगुदि हो रही थी पर मेरे हाथ पैर पलंग से बंधे थे और सर ने भी काफ़ी जोर से जकड रखा था मे बस मना करती रही और शरीर मे करंट दोडता रहा मेरी गुदगुदाती छटपटाहट से सर और ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे। इसमें इतना मज़ा आ रहा था कि बस ।सर ने को खोल कर हल्का सा काट कर चाटा मुझे फिर से वहीं मज़ा आया मैंने सर से एक बार और काटने कि रिक्वेस्ट करी जिसे सर ने तीन बार पुरा किया बहुत कोशिशों के बावजूद मैं खुद को रोक नहीं पाई ओर गयी। उसी वक्त मेरा पुरा पानी चुत मै बह गया सर ने अपना 5 ईंच का लंड मुह मै दे दिया और  5 मिनट तक चुसाते रहे। फिर सर ने गिली चुत लंड डालकर धक्का दिया  मेरी सिल टुटी और चिख निकल गयी।मिठा दर्द होने लगा चुत से छप छप कि आवाज हो रही थी क्योंकि चुत पानी से भरें कुएँ के समान हो गयी थी 15 मिनट तक चोदने के बाद मुझे लगा सर अब हट जायेगें पर वो तो रूक रूक कर फुल स्पीड मे झटके दिए जा रहे  थे ऐसा लग रहा था जबतक नहीं सर रुकेंगे नहीं 45 मिनट बाद सर ने मेरे बोबस पर रस ढोल दियाऔर मुझे आजाद कर दिया।
फिर हम दोनों बाथरूम गये जहां हम दोनों एक साथ नंगे नहाए मुझे गीला हि गोद मे ऊठा कर डायनिंग टेबल पर ले जाकर लेटा दिया और मेरी चाटने लगे पुरा नंगा  गीला गोरा बदन  वापस गर्म हो गया सर दोनों हाथों से बूब्स दबा रहे थे और मुह मेरी चुत पर लगा पड़ा था मैंने चुत को उपर उठा कर पुरा मज़ा लिया सर ने मुझे घोड़ी बना कर घांड के छेद पर मक्खन लगा कर घांड मे एक झटके से पुरा लंड घुसा दिया के मारे चिख निकलती रही मज़ा आता रहा पुरी रात चुदती रही। अब में कमल सर से जब भी मौका मिलेगा अपनी चुत कि

जिसे रात के अंधेरेमें चोदा वोह बहन निकली

मेरी उम्र २३ वर्ष हो रही है Antarvasna Kamukta Indian Sex Hindi Sex Stories Chudai मेरे परिवार में मात्र तीन लोग रहते हैं, मैं, मेरी माँ और मेरी पत्नी ! और हाँ एक औरसदस्य आज ही आया जो हमारे ही बीच का है पर आज से ठीक दो साल पहले ही उसकी शादी हो चुकी है, जो अपनेससुराल में रहती है, वह है मेरी दीदी ! जिसके पति तीन दिन पहले अरब देश जा चुके हैं, जिसके चलते वह हमारेयहाँ रहने आ गई है।

पर आते ही मेरे कमरे और मेरी बीवी पर पहला अधिकार जमा लिया। सबकी दुलारी होने से कोई कुछ नहीं मनाकरता और किसी काम को करने से नहीं रोकता है। माँ की दुलारी तथा मेरी भी बड़ी दीदी होकर भी साथ साथ पलेबढ़े हैं क्योंकि मुझसे मात्र दो साल ही बड़ी है। हम लोग उनकी सेवा में लगे हुए थे और देखते देखते शाम, फिर रातभी हो गई, परन्तु दीदी मेरे कमरे में जमी रही। अंत में मुझे दूसरे कमरे में यह सोच कर सोना पड़ा कि शायद आजही आई है तो सो गई, कल से दूसरे कमरे में सोयेंगी।

आप य कहानी देसी सेक्स स्टोरी पर पढ़रहे हें

दूसरे कमरे में आकर मैंने सोने की कोशिश की मगर नींद नहीं आई तो टी.वी. चला लिया। शनिवार होने से चैनलबदलते हुए मेरा हाथ रैन टी.वी. पर रुक गया जहाँ गर्म फिल्म आ रही थी। अब तो मेरी नींद भी जाती रही, एक तोबीवी से डेढ़ साल में पहली बार रात में अलग सोना, उस पर से रैन टी.वी. का कहर !

मुठ मारते पूरी रात काटनी पड़ी पर मन टी.वी. बिना देखे मान ही नहीं रहा था। किसी तरह मुठ मारते रात काट लीऔर सुबह काफी देर तक सोता रहा। जब उठा तब मेरी बीवी नाश्ता बना रही थी। मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली- लगता है कि काफी निश्चिंत होकर रात में सोये हैं जनाब !

मेरा नाराजगी भरा चेहरा देख कर और कुछ न बोल कर चाय का प्याला मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैं भी कुछ कहे बिनाचुपचाप से चाय पीने लगा। दिन भर सभी अपने अपने काम में लग गए, मैं भी अपने ब्रोकिंग एजेंसी को देखनेचला। दिन भर तो काम में लगा रहा, शाम को घर आने पर चाय और नाश्ता देकर बीवी फिर दीदी के पास जाकरबैठ गई जो मेरे ही सामने के कुर्सी पर बैठी नाश्ता ले रही थी।

अब मैंने थोड़ा ध्यान दीदी की तरफ दिया, सोचने लगा- क्या दीदी आज भी मेरे ही कमरे में सोयेंगी?

और बातों बातों में पता लगा कि वे आज भी नहीं जान छोड़ने वाली !

फिर वही कहानी पिछली रात वाली !

मुझे आज फिर अकेले दूसरे कमरे में सोना था ! पर आज मुझे दीदी पर बहुत गुस्सा आ रहा था और बकबकाते हुएमैं बाहर आ गया। पिछली पूरी रात खराब कर के रख दी थी !

रात होते ही मेरा मुठ मारना शुरु हो गया और आज न जाने कैसे रात कट गई, पता नहीं कब नींद लग गई !

सुबह जगा तो पूरे सात बज रहे थे। मैंने सोच रखा था चाहे कुछ भी हो आज रात रानी को (मेरी बीवी) नहीं छोड़नाहै, या तो मेरे कमरे में या रसोई में, कहीं भी चुदाई होगी तो होगी !

जैसे ही दीदी ने नहाने के लिए स्नानघर में प्रवेश किया, मैं मौका देख कर रसोई में घुस गया और पीछे से रानी कोपकड़ उसके बोबे मसलते हुए चूतड़ों की फांकों में अपने फनफनाये लंड का दबाब डालते हुए गालों को जोर से चूमलिया तो रानी बोली- कोई देख लेगा ! क्या करते हो? दो रातों में ही अकडू महराज पायजामे से बाहर हो रहे हैं, अगरदो रातें और बिता ली तो पायजामे से निकल किसी बिल में ही घुस जायेंगे तो ढूंढना मुश्किल हो जायेगा !

मैंने कहा- देखो रानी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा ! आज रात कुछ करो यार ! यह दीदी अपने तो अकेली रहनेकी सजा कट रही हैं, साथ में हमें भी मार रही हैं ! या तो तुम मेरे कमरे में आ जाना या रात को यहीं रसोई में हीचुदाई करेंगे !

रानी भी थोड़ी उत्तेजित हो चुकी थी, वह बोली- नहीं, रसोई में ठीक नहीं होगा ! मैं तुम्हारे कमरे में भी नहीं आ सकतीक्योंकि दीदी सोचेगी कि दो रात में जवानी काबू में ना रही जो मराने चली गई।

मैं बोला- तो मैं मुठ मार कर सोता रहूँ?

“नहीं जी ! मैंने ऐसा कब कहा? अगर यह समस्या सदा के लिए टालनी है तो हम अपने कमरे में ही करेंगे। अगरदीदी जाग गई तो शरमा कर कल से नहीं सोयेंगी। और ना जगी तो रोज ऐसे ही चलेगा !”

रानी का जबाब सुन कर मैंने कहा- पर इसमें तो दीदी के जागने का ज्यादा चांस है, जागने पर क्या सोचेंगी?

रानी ने कहा- मैं तो चाहती हूँ कि रात को दीदी जग जाये जिससे कल से यह समस्या ख़त्म हो जाये ! समझे बुद्धू ?

मैं समझने की कोशिश करता हुआ काम बनता देख ज्यादा ना पूछा पर जानना चाहा- पर रात में मैं तुझे पहचानूँगाकैसे?

वह बोली- मैं बेड के इसी किनारे सोऊंगी और दरवाजा खुला रखूंगी ! तुम धीरे से आ जाना बस !

मैं कुछ और पूछता, इससे पहले दीदी नहाकर निकलने जा रही थी। तो मैं धीरे से निकल चला और रात के इंतजारमें जल्दी से तैयार हो कर अपने काम पर चल दिया।

और आज तो तिसरी रात होने के कारण उसमें और खूबसूरती आ गई है। अब मुझे केवल रात का इन्तजार था।

आखिर शाम हुई, फिर रात हुई और सबने खाना खाकर अपने अपने बिछावन को पकड़ लिया पर दीदी मेरे ही कमरेमें डेरा जमाये हुए थी। इन्तजार करते करते लगभग रात के ग्यारह बज चुके थे। सम्पूर्ण अंधेरा था क्योंकि बिजलीभी नहीं थी, मकान में एकदम सन्नाटा छाया था, माँ के कमरे से खर्राटों कीआवाज आ रही थी। सुनने में ऐसा लगा कि वह गहरी नींद में होगी।

मैंने निश्चिन्त होने के लिये पांच मिनट का इन्तजार किया। अब लगभग अपने कमरे के पास पहुँच मैंने अपनादायां हाथ इस प्रकार से दरवाजे के तरफ़ बढ़ाया कि कोई हलचल न होने पाये। और कमरे के अन्दर अपने बेड केपास आकर देखने की कोशिश करने लगा पर कुछ साफ न दिखने से अन्दाजा लगाया कि रानी ने कहा था कि वहबेड के इसी तरफ़ सोयेगी। आज पहली बार मुझे अपने ही घर में अपने कमरे में चोरों की तरह घुसना पड़ रहा था।धड़कते दिल से मैं बिछावन के पास पहुँचा और मध्यम रौशनी के सहारे इस तरफ़ की आकृति को छुआ। मेरा हाथउसके चूतड़ पर लगा।
फिर कुछ देर रुक कर मैंने अपना हाथ आगे पेट की ओर बढ़ाते हुए आहिस्ता से उसके उन्नत-शिखरों की ओरखिसका दिया। मेरे हाथ का पंजा उसके स्तनों के पास पहुँच कर पूरे पंजे से उसके बोबे दबाने लगा। अब मैंने उसकेखुले गले के ब्लाऊज़ के गले के अंदर हाथ डाला तो मेरा पहला स्पर्श उसकी सिल्की ब्रा का हुआ, पर इससे तो मुझेसन्तुष्टि नहीं हुई। फिर मैंने आहिस्ता से अपना हाथ उसके स्तनों के बीच की घाटी में प्रविष्ट करा दिया औरआहिस्ता आहिस्ता उसके दोनों स्तनों पर अपने हाथ घुमाने लगा। मैं उसकी दूध की दोनों डोडियों से खेलने लगा

पति के दोस्तों की अनोखी रंडी

और आँखे भूरी है। मेरा फिगर किसी भी मर्द का लंड खड़ा करने के काबिल है, मेरी चूचियाँ गोल और बड़ी है और निपल्स काले और बहुत उभरे हुए है, जो ब्रा और ब्लाउज से भी नहीं छिपते है। मेरी गांड को हिलते देखकर किसी भी लंड का पानी छूट  जाए, मेरी चूत के होंठ एकदम रसीले और मोटे है। मेरी चूत के होंठ इतने मोटे है कि पेंटी में तो टिक ही नहीं पाते है, मेरी चूत का रंग अंदर से एकदम गुलाबी है। ये तो हुई मेरे दिखने की बात, अब में सीधी कहानी पर आती हूँ।

मेरे पति काम के सिलसिले में आधे साल तो बाहर ही रहते है। मेरी शादी की शुरुआत में तो सब सही था, कभी हम फेसबुक पर सेक्स चैट भी कर लिया करते थे। लेकिन कुछ दिनों के बाद मेरी चूत की प्यास बुझती नहीं थी, इतने सालों में वो जब छुट्टियों में वापस आते, तो तब ही मुझे चोदते है। में इतने सालों में अपने पति से जितनी बार चुदी हूँ, उससे कहीं ज़्यादा तो मेरे रंडी बनने के बाद अलग-अलग मर्दो से चुद चुकी हूँ। शुरुआत की बात है जब में बिल्कुल सीधी साधी थी, मुझे चुदाई का बहुत मन होता था, लेकिन क्या करती? मेरा पॉर्न देखकर भी जी नहीं भरता था और में गैर मर्द से चुदाई के सपने देखकर काम चला लिया करती थी, लेकिन अब मेरी चूत से सहन नहीं हो रहा था और में चुदने के लिए मरी जा रही थी, बस मुझे ख्वाइश थी तो मेरी चूत में एक लंड की। फिर एक दिन की बात है मेरे पति का दोस्त अनीश मेरे घर पर एक ज़रूरी कागज देने आया था, मुझे मालूम था कि वो मेरे बदन पर मरता था।

फिर मैंने सोचा कि क्यों ना इसके लंड के पानी से मेरी चूत की प्यास बुझाई जाए? फिर मैंने उसे इशारे देना शुरू किया और पानी देते वक़्त उसे मेरी चूचीयों का मज़ा लेने दिया। फिर में बात-बात पर उसको छूने लगी, अब वो भी मेरे करीब आने लगा और मेरी जाँघो पर अपना हाथ फैरने लगा था। फिर मैंने उसे एक स्माइल दी और वो समझ गया। फिर उसने मेरी साड़ी एक झटके में खींचकर उतार दी और ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। अब वो मेरी ब्रा के ऊपर से मेरी चूचीयों को अपने दातों में दबाने लगा था, हायययययी क्या बताऊँ कितना मजा आ रहा था? अब में अपना हाथ उसके लंड पर उसकी पेंट के ऊपर से ही फैरने लगी थी। उसका लंड बहुत ही बड़ा था, इस मोटे लंड से मेरी चूत को चुदना था। ऊफ, अब मेरी रंडी चूत को रुकना ही नहीं था।

फिर मैंने उसके भी कपड़े उतार दिए और में उसके लंड को देखती ही रह गयी और उसे अपने हाथ से सहलाने लगी, मुझे इस मोटे लंड से चुदना है, प्लीज़ इसे मेरी चूत में घुसा दो और चोदने लगो ना प्लीज। अब ये सुनकर वो हँसने लगा और मेरे बालों को ज़ोर से पकड़कर मुझे पीछे किया और बोला कि रंडी आज तो तुझे ऐसा चोदूंगा कि इस शहर की टॉप की रंडी की चूत भी तेरे आगे शर्मा जाए, तुझे तो में तेरी सुहागरात से चोदना चाहता था। फिर उसने मुझे एक थप्पड़ मारकर गिरा दिया और मेरे सारे कपड़े उतारे और मेरे पूरे नंगे बदन को चाटने और काटने लगा। फिर वो मेरी चूत का पानी चाटने लगा और अपनी उंगलियां मेरी चूत के अंदर डालकर अंदर बाहर करने लगा। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, अब कई महीनो के बाद मेरी चूत को मर्द का एहसास हो रहा था। अब में सिसकियां लेने लगी थी, आह आहह ह उम्म्म एमम आअहह एयेए आहह हह एसस्सस्स और करो ना बहुत अच्छा लग रहा है, प्लीज़ और करो ना उम्म्म एम्म्म एम्म्म यअहह आअहहहह।

अब वो और ज़ोर-जोर से करने लगा था, अया आहहहहहह। फिर वो अचानक से 69 पोज़िशन में आ गया और उसने अपना मोटा लंड झटके से मेरे मुँह में डाल दिया। अब मेरी तो साँस ही रुक गयी थी, लेकिन जो मज़ा आ रहा था ऊम्‍म्म्ममहहह। अब में उसके लंड को पूरा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी और उसके बॉल्स को अपने हाथों से सहलाने लगी थी। अब वो मेरी चूत को चाट रहा था, क्या मज़ा आ रहा था उम्म एमम एमम? अब वो काफी देर तक मेरी चूत को चाटता रहा और में उसके लंड को चूसती रही उम्म्म। अब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डालकर अंदर बाहर करने लगा था आअहह हह उम्म्म एमम। अब में झड़ने वाली थी, लेकिन उसने मुझे झड़ने नहीं दिया और उठ गया। अब मुझे चुदना था, अब में बेताब हो रही थी मुझे चोदो प्लीज़ मेरी रंडी चूत में अपना लंड डालो ना, आज फाड़ दो मेरी रंडी चूत को प्लीज़।

अब ये सुनकर वो हरामजादा हँसने लगा और उसने मुझे झटके से उल्टा कर दिया और बड़ी बेरहमी से उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया ह उम्म्म आह आह ऑश हह उम्म मज़ा आ रहा था उम्म्म। अब वो मुझे एक कुतिया की तरह चोदने लगा था, अब मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था उम्म अहह चोदो मुझे रंडी की तरह उम्म्म अहह और ज़ोर से अहह फाड़ दो मेरी चूत को आआआआहह उम्म्म्मम। फिर वो मुझे ऐसे ही आधे घंटे तक चोदता रहा, फिर उसने मुझे ऊपर आने के लिए कहा तो में झट से ऊपर आ गई और उसके लंड को अपनी चूत में डाल लिया उम्म्म्म मज़ा आ गया। फिर में उछलने लगी आह क्या मज़ा आ रहा था? अब वो मेरी चूचीयों को दबाने लगा था और मेरी उछलने की स्पीड कम हो जाए इसलिए मेरी गांड पर ज़ोर जोर से थप्पड़ मारने लगा था। अब में और ज़ोर जोर से उछलने लगी थी अहह उम्म्म एस्स उम्म्म। अब में झड़ने वाली हूँ आआहह एस्स आअहह अया आहह फुक्ककक मी आहह हहह और फिर कुछ देर के बाद में झड़ गई।

फिर भी वो कमीना ऐसे ही काफ़ी देर तक मुझे चोदता रहा। फिर बहुत देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे लेटा दिया और मेरी दोनों टाँगे एक साईड में करके फिर से चोदना शुरू किया। अब मेरी चूत का चुद-चुदकर बुरा हाल हो गया था, लेकिन ऐसा मजा मुझे कभी नहीं आया था। अब वो मुझे ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा था और अपने एक हाथ से मेरी चूत पर मसाज करने लगा था, आह क्या मजा आ रहा था उम्म? मुझे फिर झड़ना है आअहह और ज़ोर से करो, मेरी चूत को फाड़ दो आहह उम्म्म बहुत मजा आ रहा है आआहहह, मेरी चूत चाट, मेरी रंडी चूत को जोर-जोर से चाट आआ आहहह। अब वो और ज़ोर-जोर से करने लगा था, उम्म अब में झड़ रही हूँ तुम भी मेरी चूत में अपना पानी छोड़ो ना, मेरी चूत की प्यास बुझा दो उम्म्म आहह। अब वो भी झड़ने वाला था तो उसने चुदाई और तेज़ कर दी।

अब में चीखने लगी थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था आहह आह एस्स फुक्कक मी आहह अहह उम्म और में फिर से झड़ गई और उसने भी मेरी चूत में अपना पूरा पानी छोड़ दिया। फिर उसने ऐसे ही मुझे जाने से पहले 3 बार और चोदा। फिर जाते वक़्त उसने दरवाज़े पर पूछा कि क्यों प्यास बुझ गई? तो मैंने कहा कि हाँ अब तक कि तो बुझ गई, लेकिन आगे का ध्यान रख लेना और हंस पड़ी। दोस्तों अनीश ने मेरी ऐसी जबरदस्त चुदाई की जिससे मेरी चूत को तो लंड का चस्का लग गया, वो मेरे घर किसी ना किसी बहाने से आता और घंटो तक मेरी चुदाई करता और ऐसा काफ़ी दिनों तक चला। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर एक दोपहर की बात है जब अनीश ने मुझे कॉल किया और बोला कि भाभी जी कैसी हो? आज आपके लिए खास तोहफा ला रहा हूँ, आप तैयार रहना। फिर मैंने हंसकर उससे पूछा कि अच्छा, ऐसा क्या ला रहे हो? वो बोला कि देखकर आप दंग रह जाएँगी, बस आप इंतज़ार करिए और फोन रख दिया। मुझे तो सर्प्राइज़ का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था। मुझे ये तो मालूम था कि मेरी आज तो जबरदस्त चुदाई होगी, लेकिन कैसे वो तो उसके आने के बाद ही पता चलेगा, इसलिये ज़्यादा सोचना छोड़कर में तैयार होने लगी। मैंने मेहरून कलर की सेक्सी ब्रा पहनी, लेकिन पेंटी नहीं पहनी और काली साड़ी पहनकर तैयार हो गई। तभी डोर बेल की आवाज़ आई तो में दरवाज़ा खोलने गई और अनीश को देखकर में एकदम रांड की तरह पोज़ में आ गई और उसे अंदर बुलाया, लेकिन में ये देखकर चौंक गई कि वो अकेला नहीं था, उसके साथ उसके तीन दोस्त और थे, करण, रवि और प्रतीक। सब मेरे पति के बहुत अच्छे दोस्त थे और में कुछ समझ सकती उससे पहले तो सब दरवाज़ा बंद करके अंदर आ गये। फिर मैने कपड़े ठीक करते हुए अनीश के सामने देखा, अरे वहां कहाँ देख रही हो भाभी जी, हम भी आए है आज आपकी खिदमत में, बहुत किस्से सुने है आपके रंडीपन के और हम भी आपकी चूत का रस पीने आए है और ये कहकर रवि ने मेरी साड़ी खींच ली और सब लोग हंसने लगे।

में घबरा गई और गिड़गिड़ाने लगी, प्लीज़ मुझे छोढ़ दो, ऐसा मत करो और तभी अनीश ने ज़ोर से एक थप्पड़ मार दिया मुझे और मेरे बाल पकड़ लिए और कहने लगा कि साली रंडी अब तू मेरी रांड है रांड। अब में जिससे चाहूँ उससे तू चुदेगी वरना तेरे पति को सब बता दूँगा। अब आ जा औकात पर और नाटक बंद कर और नंगी हो जा चल साली रांड। दोस्तों पति को पता ना चले उस डर से में चुप हो गई और अपनी साड़ी उतारने लगी तो कारण आ गया और पीछे से मेरी चूचियां हाथ में लेकर मसलने लगा हाय भाभी जी क्या बदन है आपका? हम सब तो आपके कब से दीवाने है। फिर अजय आया और मेरे पूरे बदन पर हाथ घुमाने लगा। रवि और अनीश ये देख रहे थे और अपना अपना लंड हिला रहे थे।

तभी कारण ने मेरे ब्लाउज और ब्रा को उतारकर फेंक दिया और मेरे निपल्स को काटने लगा और चूचियों को पूरा मुहं मे लेने लगा। प्रतीक ने मेरा पेटिकोट उतार दिया और उनसे देखा की मैंने पेंटी नहीं पहनी थी तो वो बोला कि साली रंडी चुदने के लिए इतनी बेकरार है कि चूत भी ढकना भूल गई और बेमतलब का नाटक करती है कि मुझे जाने दो। आज तो तेरा ऐसा भोसड़ा बनाएँगे कि आज के बाद सिर्फ़ एक लंड से तेरा रंडीपना कभी शांत नहीं होगा।

ये कहकर उसने मुझे घुटनों पर बिठाया और अपने मोटे लंड को झटके से मेरे मुहं मे डाल दिया। चूस साली, बाहर निकाला तो तेरी खैर नहीं, साली पूरा ले उम्म्म अहजझ उम्म्म्म मुझे मज़ा आने लगा था और में मज़े से प्रतीक का लंड चूसने लगी। तभी करण ने भी अपना लंड मेरे मुहं मे घुसाया और दो लंड को चूसने से मेरी हालत खराब हो गई। मेरा साँस लेना मुश्किल हो रहा था तो मैने लंड को मुहं से बाहर निकाला।

तभी ज़ोर से अनीश ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारा और बोला कि साली रांड सुना नहीं क्या कहा गया है तुझसे, लंड बाहर नहीं निकलना है। अब सज़ा मिलेगी तुझे और यह कहते ही उसने मेरी गांड को बेरहमी से उपर उठाया और अपने मोटे लंड को घुसा दिया मेरी गांड मे, आहह आह नहीं। अब में दर्द के मारे चीखने लगी आआहह आहह आआहह, लेकिन फिर डर के मारे लंड चूसने लगी उम्म्म आआहह। अब अनीश मेरी गांड मार रहा था और में प्रतीक और कारण का लंड चूस रही थी। अब मुझे मज़ा आने लगा था उम्म्म आह आहह और रवि मेरी चूचियों को दबा रह था और में एक हाथ से उसके लंड को मसलने लगी। में एक साथ चार लंड का मज़ा ले रही थी और ये तो मैंने कभी सपने मे भी नहीं सोचा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

तभी अनीश ने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और करण और प्रतीक ने मेरे मुहं से लंड बाहर निकाला। कुतिया बहुत मज़ा आ रहा है ना तुझे, ये तो बस शुरुआत है रंडी और ये कहकर करण बेड पर लेट गया और मुझे अपने लंड पर बिठा लिया। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था उम्म्म आआअहह आआहह। फिर तभी रवि ने ज़ोर से मेरे गांड पर थप्पड़ मारा और चूतड़ो को खोला और मेरी गांड मे अपना मोटा लंड डाल दिया।

मेरी तो जान ही निकल गई, मानो मेरी गांड और चूत दोनों को एक साथ दो लंड पेल रहे थे। मुझे ऐसा मजा कभी नहीं आया था और में भी दोनों का साथ देने लगी उम्म्म उम्म आहह और चोदो, में तुम्हारी रांड हूँ, मेरा भोसड़ा बना दो प्लीज़, आ आअहह ऐसा मजा मुझे आज से पहले कभी नहीं आया आआ सस्स, फाड़ दो मेरी गांड और चूत। ये सुनकर सब हँसने लगे और बोले लंड घुसते ही आ गयी रांड औकात पर और ये कहकर अनीश ने अपना लंड मेरे मुहं मे घुसेड़ा। फिर तभी प्रतीक ने भी अपने लंड को मेरी गांड मे घुसाने की कोशिश की और में दर्द के मारे चिल्ला रही थी। अब मेरे बदन मे चार लंड घुसे हुए थे और ऐसी रंडियो वाली चुदाई तो में कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी। फिर वो मुझे ऐसे ही बहुत देर तक चोदते रहे।

तभी रवि ने भी अपना पानी छोड़ा और दोनों काफ़ी देर तक लगे रहे। फिर करण भी मेरी गांड में झड़ गया और कुछ देर बाद प्रतीक ने भी मेरे पूरे बदन पर अपना पानी छोड़ दिया।

मेरा चुदाई से हाल बेहाल था और फिर भी हरामजादों ने मुझे अलग अलग पोज़िशन मे रात भर चोदा और सुबह उठकर कब चले गये मुझे पता ही नहीं लगा। मेरा पूरा बदन दर्द से चूर हो रहा था, लेकिन रांड बनकर एक अलग एहसास हो रहा था ।।

धन्यवाद …